आज मैं बेठी तो अपनी ज़िन्दगी के कुछ लम्हे बाटने थी लेकिन अचानक से यह कलम उस और मुड़ गयी जिसे मैने सिर्फ आँखों से देखा लेकिन कभी दिल से महसूस नही किया ............आज इस कलम की ताकत का अंदाजा हो गया मुझे ....यह आपके हर अहसास को शब्दों म पिरो सकती हैं ...........बस आप इसके साथ ईमानदार होने चाहिए .......... वो पल ,वो लम्हा जब ये सांसे अपनी माँ की सांसो से जुदा होकर इस अनजानी सी दुनिया में मेरे पहेले अस्तित्व की गवाह बनी ।अपने माँ के गर्भ में अपने पहेले अंश से लेकर एक नवजात बनने तक का सफ़र जितना अदभुत मेरी माँ के लिए था उतना ही मेरे लिए भी ........किसी लम्हे को क़तर कर मेरी उस नन्ही सी ज़िन्दगी का हक़ मुझ से कोई नही छीन सकता ।उनकी सांसो से खुद के जिन्दा रहने का अहसास ,उनकी बातों से सिर्फ मेरी माँ होने का ख़वाब .रोटी के हर एक टुकड़े में मेरा भी हिस्सा होने का हक़ .....................उनके चलने ,फ़िरने ,उठने ,बैठने ,हंसने में हर पल होने का अहसास ।जब वो छूती थी तो............तो ऐसा लगता था जैसे मेरा ख़ुदा मेरे साथ है ।मेरी एक दुनिया थी मेरे माँ के अन्दर ,जिसमे मैं और मेरा ख़ुदा बसता था ।पर शायद वो ख़ुदा जलता था ,मेरी उस दुनिया से ...जंहा मेरा अपना ख़ुदा बसता था ............वो दिन नफ़रत करती हूँ उस से .....भागती हूँ ,डरती हूँ उजाले के उस अन्देहरे से .............................।वो सिर्फ एक लम्हा जिस ने मुझे मेरी माँ से अलग कर दिया .....सबको लगा की यह इस दुनिया में मेरी पहली शुरुआत है ।पर वो तो अंत था .......मैं , मेरी माँ से नहीं मेरी ज़िन्दगी से अलग हो गयी थी और टूट गयी थी उस बेदर्द ख़ुदा के कदमों में .........लेकिन मेरी उस आवाज को कोई ख़ुदा नही दबा सकता जिसमे दर्द था अपनी माँ से अलग होने का ......तकलीफ थी अपने सांसो के टूट जाने की ........हाँ नफरत करती हूँ उस उस से जिसे सब भगवान कहेते है और बेहद प्यार करती हूँ अपने उस खुदा से जिसके हर आँसू को मेरी इन नन्ही हथेलियों में सहेज कर रखा है मैने ....................................................................... एक ही आरजू है उस अब तो की चाहे मैं अपनी ज़िन्दगी से हार गयी पर कभी नही हारुन्गी उस खुदा से जिसने मुझे मेरी माँ से अलग किया
ऐ खुदा मेरे कदमो के तले जो ज़मी है देख ले ,,,,
उसके आगे अब तेरा ये आसमा कुछ भी नही !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!