Monday, 17 September 2012

adhuri chahat

आज मै आप सभी को एक कहानी सुनाती हू ।एक  आम  कहानी ,जो  एक  आम  इंसान की आम ज़िन्दगी का हिस्सा थी ,लेकिन  वो दर्द ..........वो दर्द आम नही था ।तेज -तेज बहती हुई सर्द हवाएँ ,जो शरीर को अन्दर तक झकझोर  दें .खून को जमा दे ,,लेकिन फिर भी कही दूर पहाड़ के उस कोने पर खड़ा होकर कोई रोता ही जा रहा था ......रोता ही जा रहा था ,उसके आँखों से गिरता हुआ हर एक आंसू उन सर्द बादलों को भिगो दे रहा था ।हर एक वो शब्द जो उस के दिल से निकल रहा था ........कही दूर उन बेज़ा नदियों में भी हलचल पैदा कर रहा था ।जब मैने उसे  देखा .....तो ऐसा लगा ....ऐसा लगा जैसे समय ठहर गया हैं ,उसकी ज़िन्दगी में ,,,सब बेहद आगे निकल गए और वो ऊचाई पर पहुच कर भी वही अकेला तन्हा खड़ा रह गया ।जब मैने जाना ,,तो पता चला कि ज़िन्दगी ने एक घिनोना मजाक किया था उसके साथ ...।उसे एक ऐसा ख़वाब टूटने का दर्द दिया ,जो उन आँखों ने कभी देखा ही नही ।एक ऐसा ख़वाब जो किसी और की आँखों ने देखा था ,लेकिन उसके टूटने का असर जाने कितनी ज़िन्दगी पर हुआ ।वो ऐसा खवाब था ,,जो उस लड़के  की ज़िन्दगी के साथ बढता ही चला गया .....लेकिन वो ...वो लड़का पूरी तरह  बेखबर था ....इन खवाबो और हक़ीकत की दुनिया से ।उन खवाबो में खामोश चाहत थी .....उसके लिये किसी की ।उस बेजुबा प्यार ने तभी जन्म ले लिया था ,जब ये दिल खवाबो और हक़ीकत  के बीच अंतर करना भी नही सीख पाता इसलिए इस प्यार को भी पहेले दोस्ती  का ही नाम मिला ......एक बेहद ही गहरी दोस्ती ..जिसने ज़िन्दगी को बेहद ही आसान  बना दिया ।लेकिन पता ही नही चला उस लड़की को की कब वो दोस्ती खामोश चाहत में बदल गई पर उस लड़की ने कभी उस ख़वाब को हक़ीकत बनने ही नही दिया ,,शायद इस डर से कि कही ये चाहत दोस्ती के उन लम्हों को तबाह ना कर दे ,जिनकी कीमत दुनिया की कोई दौलत नही चुका सकती ।
                      पर दूर आसमान में तेज -तेज बहती उन हवाओ ने कुछ और ही सोच  रखा था ।उन कोरे बादलों पर किसी के दर्द की कहानी लिखी जा चुकी थी ,जिसे कोई नही बदल सकता था ...कोई नही ।
                                           अचानक से वो आँखे जिन्होंने उस ख्वाब को पनाह दी ,वो बेजा होने लगी ,,,पता चला कि किसी ऐसी बीमारी ने उस खुबसूरत खवाब को जकड़ लिया था कि अब उसके टूटने के बाद ही अनवरत चलते इस दर्द का अंत होना तय था ।तब पता नही कैसे  ,,किस लम्हे में उस खामोश ,,बेजुबा चाहत को शब्द मिल गए ,,खोल  कर रख दिया उस लड़की ने अपने दिल को ,,उस लड़के के सामने ....हर एक लम्हा ,,हर एक पल कह सुनाया उस ने।सांसो की वो आखिरी कड़ी ,,आँखों में अधूरी चाहत का दर्द ,होठो पर वो टूटे हुए शब्द सब ने उस पाक मोब्ह्बत की गवाही दी।लेकिन वो आखिरी लम्हा ,वो आँखें ,वो ख़वाब .....उन सब ने किसी की ज़िन्दगी को इस कदर बदल दिया कि उस दर्द को लिखते लिखते यह कलम भी सूखने लगी ......वो दर्द उसी लड़के की जुबानी .....
                                                           तुम्हें  भूलने की औकात नही हैं मेरी ,
                                                           आँखे  बंद करने की देरी होती हैं बस ,
                                                            मैं मौत के आगोश से भी उठ खड़ा होंगा ,
                                                           अगर पायल की आहट होगी तेरी !!!!

Friday, 24 August 2012

                                                      

 आज  मैं   बेठी  तो अपनी ज़िन्दगी के कुछ लम्हे बाटने थी लेकिन अचानक से यह कलम उस और मुड़ गयी जिसे मैने सिर्फ आँखों से देखा लेकिन कभी दिल से  महसूस नही किया ............आज इस कलम की ताकत का अंदाजा हो गया मुझे ....यह आपके हर अहसास को शब्दों म पिरो सकती हैं ...........बस आप इसके साथ ईमानदार होने चाहिए ..........                               वो पल ,वो लम्हा  जब ये सांसे अपनी माँ की सांसो से जुदा होकर इस अनजानी सी दुनिया में मेरे पहेले अस्तित्व की गवाह बनी ।अपने माँ के गर्भ में अपने पहेले अंश से लेकर एक नवजात बनने तक का सफ़र जितना अदभुत मेरी माँ के लिए था उतना ही मेरे लिए भी ........किसी लम्हे को क़तर कर मेरी उस नन्ही सी ज़िन्दगी का हक़ मुझ से कोई नही छीन   सकता ।उनकी सांसो से खुद के जिन्दा रहने का अहसास ,उनकी बातों से सिर्फ मेरी माँ होने का ख़वाब .रोटी के हर एक टुकड़े में मेरा भी हिस्सा होने का हक़ .....................उनके चलने ,फ़िरने ,उठने ,बैठने ,हंसने में हर पल होने का अहसास ।जब वो छूती थी तो............तो ऐसा लगता था जैसे मेरा ख़ुदा मेरे साथ है ।मेरी एक दुनिया थी मेरे माँ के अन्दर ,जिसमे मैं  और मेरा ख़ुदा बसता था ।पर शायद वो ख़ुदा जलता था ,मेरी उस दुनिया से ...जंहा मेरा अपना ख़ुदा बसता था ............वो  दिन नफ़रत करती हूँ उस से .....भागती हूँ ,डरती हूँ उजाले के उस अन्देहरे से .............................।वो सिर्फ एक  लम्हा जिस ने मुझे मेरी माँ से अलग कर दिया .....सबको लगा की यह इस दुनिया में मेरी पहली शुरुआत है ।पर वो तो अंत था .......मैं , मेरी माँ  से नहीं मेरी ज़िन्दगी से  अलग हो गयी थी और टूट गयी थी उस बेदर्द ख़ुदा के कदमों में .........लेकिन मेरी उस आवाज को कोई ख़ुदा नही दबा सकता जिसमे दर्द था अपनी माँ से अलग होने का ......तकलीफ थी अपने सांसो के टूट जाने की ........हाँ नफरत करती हूँ उस उस से जिसे सब भगवान कहेते है और बेहद प्यार करती हूँ अपने उस खुदा से जिसके हर आँसू  को मेरी इन नन्ही हथेलियों में सहेज कर रखा  है मैने .......................................................................  एक  ही  आरजू  है  उस  अब  तो  की  चाहे  मैं  अपनी  ज़िन्दगी  से  हार  गयी पर  कभी  नही हारुन्गी उस खुदा  से  जिसने मुझे मेरी माँ  से अलग किया                 

                            ऐ  खुदा  मेरे कदमो  के  तले जो ज़मी  है  देख  ले ,,,,    
                            उसके आगे अब तेरा ये आसमा कुछ भी नही !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!